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प्रतिशोध की डोरवां23एपिसोड

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प्रतिशोध की डोर

लोहित राजवंश की बेटी आधुनिक युग में सौतेली माँ द्वारा निर्वासित 'मीनाक्षी चतुर्वेदी' के रूप में पुनर्जन्म लेती है। दो वर्ष पश्चात् स्वार्थी चतुर्वेदी परिवार उसे विवाह के लिए बुलाता है। अब JS — विश्व प्रसिद्ध कढ़ाई कलाकार बन चुकी मीनाक्षी 'चतुर्वेदी समूह' पर अधिकार पाने के लिए मायाजाल रचती है। प्रतिशोध के इस समर में 'जितेश बंसल' का निश्छल प्रेम उसके अंतर्मन को जीत लेता है। अंततः मीनाक्षी प्रतिशोध संग अपना सच्चा प्रेम भी पा लेती है।
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इस एपिसोड की समीक्षा

सफेद पोशाक वाली रानी का राज

इस दृश्य में सफेद पोशाक पहनी महिला की शांत मुस्कान सबसे खतरनाक हथियार लगती है। जब बाकी सब कागजात देखकर घबरा रहे हैं, वह इतनी रिलैक्स कैसे रह सकती है?लगता है उसे पहले से सब पता था। प्रतिशोध की डोर में ऐसे पल ही तो दर्शकों को बांधे रखते हैं। उसकी आंखों में डर नहीं, बल्कि एक अजीब सी चमक है जो बताती है कि असली खेल तो अब शुरू हुआ है।

बुजुर्ग अध्यक्ष का गुस्सा जायज था

काले सूट वाले बुजुर्ग व्यक्ति का गुस्सा देखकर रोंगटे खड़े हो गए। उन्होंने न केवल अपना आईडी कार्ड फेंका बल्कि पूरी मीटिंग का माहौल ही बदल दिया। यह स्पष्ट है कि कंपनी में कुछ बहुत गड़बड़ चल रहा है। प्रतिशोध की डोर की कहानी में यह मोड़ बहुत ही रोमांचक है। उनकी आवाज में जो कंपन था, वह सिर्फ गुस्सा नहीं, बल्कि धोखा मिलने का दर्द भी था।

मीटिंग रूम का तनावपूर्ण माहौल

कांच की दीवारों वाले इस मॉडर्न मीटिंग रूम में जो खामोशी छाई है, वह चीखने से ज्यादा डरावनी है। हर किसी के चेहरे पर अलग-अलग भाव हैं - कोई डरा हुआ है, तो कोई गुस्से में है। प्रतिशोध की डोर के इस एपिसोड में कैमरा वर्क ने हर इमोशन को कैद किया है। जब वह व्यक्ति खड़ा हुआ, तो लगा जैसे किसी बड़े तूफान की शुरुआत हो गई हो।

कागजात में छिपा है असली सच

सबकी नजरें उन सफेद कागजातों पर टिकी हैं जो शायद किसी बड़े घोटाले या धोखे का सबूत हैं। जिस तरह से लोग उन्हें पढ़ रहे हैं, उससे साफ है कि यह कोई साधारण रिपोर्ट नहीं है। प्रतिशोध की डोर में यह सस्पेंस बहुत अच्छे से बनाया गया है। शायद इन कागजातों में ही उस सफेद पोशाक वाली महिला के खिलाफ कोई सबूत है, या फिर वह खुद ही इसका मास्टरमाइंड है।

नीली शर्ट वाली महिला की प्रतिक्रिया

नीली शर्ट पहनी महिला का रिएक्शन सबसे नेचुरल लगा। जब उसे कागजात मिले, तो वह चौंक गई और तुरंत अपने सहकर्मी से बात करने लगी। यह दिखाता है कि वह ईमानदार है और उसे इस साजिश के बारे में पहले से नहीं पता था। प्रतिशोध की डोर में ऐसे किरदार ही कहानी को संतुलित रखते हैं। उसकी घबराहट असली लगती है, न कि नाटकीय।

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