जब दादी ने उस लड़की की तरफ देखा जो उपहार लाई थी, तो उनकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी। ऐसा लगा जैसे वे सब कुछ जानती हों। प्रतिशोध की डोर में यह दृश्य बहुत ही तनावपूर्ण था। दादी का शांत रहना और बाकी लोगों का घबरा जाना, यह विरोधाभास ही कहानी की जान है।
वह लड़की जो गुलाबी साड़ी में थी, उसका आत्मविश्वास देखकर हैरानी हुई। जब बाकी लड़कियां डरी हुई थीं, तो वह मुस्कुरा रही थी। प्रतिशोध की डोर में उसका किरदार बहुत मजबूत लग रहा है। उसकी आँखों में एक अलग ही चमक थी, जैसे वह जानती हो कि अंत में जीत उसी की होगी।
जब उस लड़की ने दादी को उपहार दिया, तो कमरे में सन्नाटा छा गया। सबकी सांसें रुकी हुई थीं। प्रतिशोध की डोर में यह दृश्य बहुत ही ड्रामेटिक था। दादी का चेहरा पढ़ना मुश्किल था, लेकिन उनकी आँखों में एक गहरी समझ थी। यह पल कहानी का टर्निंग पॉइंट लग रहा है।
जब दो लड़के सीढ़ियों से उतर रहे थे, तो उनका अंदाज बहुत ही शानदार था। प्रतिशोध की डोर में इन दोनों का एंट्री सीन बहुत ही प्रभावशाली था। एक की आँखों में गंभीरता थी तो दूसरे में एक अलग ही आकर्षण। यह दृश्य देखकर लगता है कि कहानी में इनका बड़ा रोल होगा।
इस पार्टी में लड़कियों के बीच की प्रतिस्पर्धा साफ दिख रही थी। हर कोई दूसरे को पीछे छोड़ना चाहता था। प्रतिशोध की डोर में यह तनाव बहुत ही अच्छे से दिखाया गया है। खासकर जब दादी ने उस लड़की की तरफ देखा जो उपहार लाई थी, तो बाकी लड़कियों के चेहरे पर ईर्ष्या साफ दिख रही थी।