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प्रतिशोध की डोरवां7एपिसोड

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प्रतिशोध की डोर

लोहित राजवंश की बेटी आधुनिक युग में सौतेली माँ द्वारा निर्वासित 'मीनाक्षी चतुर्वेदी' के रूप में पुनर्जन्म लेती है। दो वर्ष पश्चात् स्वार्थी चतुर्वेदी परिवार उसे विवाह के लिए बुलाता है। अब JS — विश्व प्रसिद्ध कढ़ाई कलाकार बन चुकी मीनाक्षी 'चतुर्वेदी समूह' पर अधिकार पाने के लिए मायाजाल रचती है। प्रतिशोध के इस समर में 'जितेश बंसल' का निश्छल प्रेम उसके अंतर्मन को जीत लेता है। अंततः मीनाक्षी प्रतिशोध संग अपना सच्चा प्रेम भी पा लेती है।
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इस एपिसोड की समीक्षा

चाय की चुस्की में छिपा राज

इस दृश्य में चाय पीने का तरीका इतना खूबसूरत है कि लगता है जैसे कोई जादू चल रहा हो। पुरुष पात्र की आँखों में एक अजीब सी चमक है जो बताती है कि वह कुछ छिपा रहा है। महिला का मुस्कुराना और फिर अचानक गंभीर हो जाना दर्शकों को हैरान कर देता है। प्रतिशोध की डोर की कहानी में यह छोटा सा पल बहुत बड़ा असर छोड़ता है। नेटशॉर्ट ऐप पर ऐसे दृश्य देखना सच में सुकून देता है।

काले कार्ड का रहस्य

जब वह काला कार्ड टेबल पर रखा गया, तो पूरा माहौल बदल गया। ऐसा लगा जैसे कोई गुप्त संधि हो रही हो। पुरुष पात्र का फोन चेक करना और फिर महिला का उठकर चले जाना – सब कुछ इतना ड्रामेटिक है कि सांस रुक जाए। प्रतिशोध की डोर में ऐसे ट्विस्ट्स ही तो दर्शकों को बांधे रखते हैं। नेटशॉर्ट पर यह सीन बार-बार देखने लायक है।

बारिश में भीगती हुई खूबसूरती

बारिश में भीगती हुई महिला का दृश्य दिल को छू लेता है। उसकी साड़ी, उसके गहने, सब कुछ इतना सुंदर लग रहा था कि लगता था जैसे कोई फिल्म का सीन हो। पुरुष पात्र का दूर से देखना और फिर कार में बैठकर उसे देखना – यह सब इतना रोमांटिक है। प्रतिशोध की डोर में ऐसे पल ही तो कहानी को जीवंत बनाते हैं। नेटशॉर्ट ऐप पर यह दृश्य देखकर मन शांत हो गया।

फोन मैसेज का झटका

जब फोन पर फ्रेंड रिक्वेस्ट अप्रूव्ड का मैसेज आया, तो लगा जैसे कोई बड़ा खुलासा होने वाला है। पुरुष पात्र का चेहरा देखकर लगता है कि वह कुछ सोच रहा है। महिला का कार में बैठकर मुस्कुराना और फिर अचानक गंभीर हो जाना – सब कुछ इतना रहस्यमयी है। प्रतिशोध की डोर में ऐसे मोड़ ही तो दर्शकों को बांधे रखते हैं। नेटशॉर्ट पर यह सीन बहुत ही शानदार है।

साड़ी की झलक

महिला की साड़ी का डिजाइन इतना खूबसूरत है कि लगता है जैसे कोई राजकुमरी हो। उसके गहने, उसके बाल, सब कुछ इतना परफेक्ट है कि लगता है जैसे कोई फैशन शूट हो रहा हो। पुरुष पात्र का उसे देखना और फिर अचानक मुड़कर चले जाना – यह सब इतना ड्रामेटिक है। प्रतिशोध की डोर में ऐसे दृश्य ही तो कहानी को जीवंत बनाते हैं। नेटशॉर्ट ऐप पर यह सीन देखकर मन खुश हो गया।

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