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प्रतिशोध की डोरवां60एपिसोड

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प्रतिशोध की डोर

लोहित राजवंश की बेटी आधुनिक युग में सौतेली माँ द्वारा निर्वासित 'मीनाक्षी चतुर्वेदी' के रूप में पुनर्जन्म लेती है। दो वर्ष पश्चात् स्वार्थी चतुर्वेदी परिवार उसे विवाह के लिए बुलाता है। अब JS — विश्व प्रसिद्ध कढ़ाई कलाकार बन चुकी मीनाक्षी 'चतुर्वेदी समूह' पर अधिकार पाने के लिए मायाजाल रचती है। प्रतिशोध के इस समर में 'जितेश बंसल' का निश्छल प्रेम उसके अंतर्मन को जीत लेता है। अंततः मीनाक्षी प्रतिशोध संग अपना सच्चा प्रेम भी पा लेती है।
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इस एपिसोड की समीक्षा

अस्पताल का वह पल

अस्पताल के कमरे में वह दृश्य बहुत भावुक था जब लड़की ने घायल लड़के का हाथ थामा। उनकी आँखों में छिपा दर्द और एक-दूसरे के प्रति लगाव साफ झलक रहा था। प्रतिशोध की डोर की कहानी में यह मोड़ बहुत गहरा है, जहाँ चुप्पी भी शब्दों से ज्यादा बोलती है।

परिवार का फैसला

लिविंग रूम में बुजुर्ग व्यक्ति का गुस्सा और फिर अचानक शांत हो जाना, यह सब एक बड़ी साजिश की ओर इशारा करता है। जब उन्होंने लाल लिफाफा दिया, तो माहौल में तनाव था। प्रतिशोध की डोर में परिवार की राजनीति और रिश्तों की उलझन बहुत बारीकी से दिखाई गई है।

सफेद सूट वाला रहस्य

सफेद सूट पहने युवक का चेहरा देखकर लगता है कि वह सब कुछ जानता है लेकिन चुप है। उसकी मुस्कान के पीछे छिपा दर्द या शायद कोई योजना? प्रतिशोध की डोर में इस किरदार की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण लग रही है, जो आगे चलकर कहानी को नया मोड़ देगा।

गुलाबी पोशाक का संकेत

गुलाबी पोशाक में वह लड़की बहुत खूबसूरत लग रही थी, लेकिन उसकी आँखों में एक अजीब सी चिंता थी। जब उसे वह लाल किताब दी गई, तो उसका रिएक्शन बहुत सूक्ष्म था। प्रतिशोध की डोर में हर किरदार के चेहरे पर एक अलग कहानी लिखी हुई है।

लाठियों वाला बुजुर्ग

वह बुजुर्ग व्यक्ति जो लाठी टेककर बैठता है, उसकी आवाज़ में एक अलग ही दबदबा है। उसने जब लाल लिफाफा निकाला, तो सबकी सांसें रुक गईं। प्रतिशोध की डोर में इस किरदार का प्रभाव इतना गहरा है कि लगता है वही असली खिलाड़ी है।

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