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प्रतिशोध की डोरवां46एपिसोड

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प्रतिशोध की डोर

लोहित राजवंश की बेटी आधुनिक युग में सौतेली माँ द्वारा निर्वासित 'मीनाक्षी चतुर्वेदी' के रूप में पुनर्जन्म लेती है। दो वर्ष पश्चात् स्वार्थी चतुर्वेदी परिवार उसे विवाह के लिए बुलाता है। अब JS — विश्व प्रसिद्ध कढ़ाई कलाकार बन चुकी मीनाक्षी 'चतुर्वेदी समूह' पर अधिकार पाने के लिए मायाजाल रचती है। प्रतिशोध के इस समर में 'जितेश बंसल' का निश्छल प्रेम उसके अंतर्मन को जीत लेता है। अंततः मीनाक्षी प्रतिशोध संग अपना सच्चा प्रेम भी पा लेती है।
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इस एपिसोड की समीक्षा

पार्किंग में रोमांस का धमाका

पार्किंग गैरेज में इतना इंटेंस सीन देखकर दिल की धड़कन रुक गई। जब वो भागते हुए आए और उसे बचाया, तो लगा जैसे प्रतिशोध की डोर का क्लाइमेक्स आ गया हो। उनकी आंखों में डर और प्यार दोनों साफ दिख रहे थे। एक्शन और रोमांस का यह मिश्रण बेहतरीन था।

गुंडों से टकराव और प्यार

सफेद शर्ट वाले गुंडों का पीछा करना और फिर हीरो का एंट्री लेना, सब कुछ एक एक्शन मूवी जैसा लगा। लेकिन असली मजा तब आया जब उन्होंने उसे गले लगाया। प्रतिशोध की डोर में ऐसे सीन्स देखकर ही तो हम फैन होते हैं। नेटशॉर्ट ऐप पर यह सीन बार-बार देखने को मन करता है।

नज़रों का जादू

जब वो दोनों एक-दूसरे को देख रहे थे, तो लग रहा था कि समय थम गया है। उनकी नज़रों में इतनी गहराई थी कि बिना कुछ बोले सब कह दिया। प्रतिशोध की डोर के इस सीन में डायलॉग की जरूरत ही नहीं पड़ी, बस चेहरे के एक्सप्रेशन काफी थे। सच में जादूई पल था।

हीरो की एंट्री धमाकेदार

जैसे ही वो काले सूट में आए और गुंडों को धक्का दिया, मैं चीख पड़ी। उनकी बॉडी लैंग्वेज से साफ पता चल रहा था कि वो उस लड़की के लिए कुछ भी कर सकते हैं। प्रतिशोध की डोर का यह सीन मेरा फेवरेट बन गया है। हीरो का प्रोटेक्टिव अवतार देखकर मजा आ गया।

डर और राहत का मिश्रण

लड़की के चेहरे पर जब डर था और फिर हीरो को देखकर राहत, उस पल को कैमरे ने बहुत खूबसूरती से कैद किया है। प्रतिशोध की डोर में इमोशन्स को इतनी बारीकी से दिखाना आसान नहीं होता। नेटशॉर्ट पर यह सीन देखकर रोंगटे खड़े हो गए।

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