ऑफिस की वो पहली झलक ही सब कुछ बता देती है। सफेद साड़ी में बैठी वो महिला कितनी शांत और गंभीर लग रही थी, जबकि उसकी असिस्टेंट खड़ी होकर रिपोर्ट दे रही थी। फिर अचानक फोन पर 'जेएस' का मैसेज आया और माहौल बदल गया। लगता है प्रतिशोध की डोर अब खिंचने वाली है। ये किरदार इतने गहराई से लिखे गए हैं कि हर एक्सप्रेशन मायने रखता है।
दादी का वो पुराना ज़ेवर देखकर ही समझ आ गया कि कहानी में कुछ बड़ा होने वाला है। वो लड़का जो वेस्ट पहने बैठा था, उसकी आँखों में एक अजीब सी बेचैनी थी। जब दादी ने वो ब्रोच दिखाया, तो लगा जैसे किसी पुरानी याद को ताज़ा किया गया हो। प्रतिशोध की डोर में ऐसे ही छोटे-छोटे संकेत कहानी को आगे बढ़ाते हैं।
लड़के का फोन पर बात करते हुए चेहरा देखकर ही तनाव महसूस हो रहा था। वो बार-बार उंगली से होंठ छू रहा था, जो उसकी घबराहट को दर्शाता है। सामने बैठी दादी की चुप्पी और गहरी नज़रें सब कुछ कह रही थीं। ये सीन बताता है कि परिवार के अंदर कितनी जटिल राज़ छिपे हो सकते हैं।
गुलाबी साड़ी में वो महिला बाहर बैठकर कढ़ाई कर रही थी, कितनी सुकून भरी तस्वीर थी। लेकिन अंदर ही अंदर शायद वो भी किसी योजना को अंजाम दे रही है। जब ऑफिस वाली महिला ने मैसेज किया कि वो कपड़े बनवाना चाहती है, तो लगा कि ये मिलन सिर्फ संयोग नहीं है। प्रतिशोध की डोर की कहानी में हर धागा जुड़ा हुआ है।
'तुम्हें जेएस पता है?' ये एक साधारण सवाल नहीं था, ये तो आग लगाने वाली माचिस थी। ऑफिस में बैठी महिला के चेहरे के भाव देखते ही बनते थे। फिर वो मैसेज जिसमें मिलने का समय और जगह तय की गई। ये सब इतनी तेज़ी से हुआ कि साँस रुक गई। नेटशॉर्ट ऐप पर ऐसे ही मोड़ देखना सबसे मज़ेदार होता है।