वह गुलाबी पोशाक पहने लड़की इतनी शांत कैसे रह सकती है जब बाकी सब उसे घूर रहे हैं? उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक है जो बताती है कि वह हारने वाली नहीं है। जब वह कढ़ाई वाला फ्रेम दिखाती है, तो लगता है जैसे वह किसी बड़े खेल की शुरुआत कर रही हो। प्रतिशोध की डोर में ऐसे दृश्य देखकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं। उसकी मुस्कान के पीछे छिपा दर्द और गुस्सा साफ झलक रहा है।
शुरुआत में तो लगा कि यह बूढ़ी महिला बस एक साधारण दादी हैं, लेकिन जब उन्होंने उन तीनों लड़कियों को घुटनों के बल बैठने का इशारा किया, तो सब कुछ बदल गया। उनकी आँखों में एक अजीब सी सत्ता थी जो किसी राजा की तरह लग रही थी। प्रतिशोध की डोर के इस मोड़ ने सबको हैरान कर दिया। वह लड़की जो कढ़ाई कर रही थी, उसकी जीत पक्की लग रही है।
जब वह तीनों लड़कियां एक साथ घुटनों के बल बैठ गईं, तो लगा जैसे किसी ने उनकी सारी ताकत छीन ली हो। उनकी पोशाकें चमकदार थीं, लेकिन उनकी आँखों में डर साफ दिख रहा था। प्रतिशोध की डोर में ऐसे दृश्य देखकर लगता है कि अब कुछ बड़ा होने वाला है। वह लड़की जो कढ़ाई कर रही थी, उसकी जीत अब तय है।
वह लड़का जो बालकनी में खड़ा था, उसकी आँखों में एक अजीब सी उदासी थी। वह सब कुछ देख रहा था, लेकिन कुछ नहीं कह रहा था। प्रतिशोध की डोर में ऐसे किरदार हमेशा कहानी को नया मोड़ देते हैं। लगता है कि वह उस गुलाबी पोशाक वाली लड़की से कुछ खास रिश्ता रखता है। उसकी चुप्पी सब कुछ कह रही है।
वह कढ़ाई वाला फ्रेम सिर्फ एक साधारण चीज नहीं है, बल्कि यह किसी बड़े रहस्य की चाबी है। जब वह लड़की उसे दिखाती है, तो लगता है जैसे वह किसी पुराने वादे को याद दिला रही हो। प्रतिशोध की डोर में ऐसे छोटे-छोटे विवरण कहानी को गहराई देते हैं। उस फ्रेम में बने फूल शायद किसी खास व्यक्ति के लिए हैं।