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प्रतिशोध की डोरवां57एपिसोड

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प्रतिशोध की डोर

लोहित राजवंश की बेटी आधुनिक युग में सौतेली माँ द्वारा निर्वासित 'मीनाक्षी चतुर्वेदी' के रूप में पुनर्जन्म लेती है। दो वर्ष पश्चात् स्वार्थी चतुर्वेदी परिवार उसे विवाह के लिए बुलाता है। अब JS — विश्व प्रसिद्ध कढ़ाई कलाकार बन चुकी मीनाक्षी 'चतुर्वेदी समूह' पर अधिकार पाने के लिए मायाजाल रचती है। प्रतिशोध के इस समर में 'जितेश बंसल' का निश्छल प्रेम उसके अंतर्मन को जीत लेता है। अंततः मीनाक्षी प्रतिशोध संग अपना सच्चा प्रेम भी पा लेती है।
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इस एपिसोड की समीक्षा

घर का माहौल तनावपूर्ण

बूढ़े दादाजी का गुस्सा और पोते की मजबूरी देखकर दिल दहल गया। प्रतिशोध की डोर में यह सीन दिखाता है कि कैसे पारिवारिक दबाव रिश्तों को तोड़ सकता है। दादी का चुप रहना भी एक तरह का संकेत है कि वे सब जानती हैं लेकिन कुछ नहीं कर सकतीं।

काले सूट वाला लड़का

उसकी आँखों में डर और गुस्सा दोनों साफ दिख रहे थे। जब वह घुटनों पर गिरा तो लगा जैसे उसकी आत्मा टूट गई हो। प्रतिशोध की डोर की कहानी में यह पल सबसे ज्यादा दर्दनाक है क्योंकि वह अपने ही घर में अजनबी बन गया है।

दादी का खामोश दर्द

नीली साड़ी वाली दादी की आँखों में आँसू थे लेकिन वे रो नहीं रही थीं। शायद वे जानती थीं कि अब कुछ नहीं बदलेगा। प्रतिशोध की डोर में उनका किरदार सबसे ज्यादा गहरा है क्योंकि वे सब कुछ सहन कर रही हैं बिना कुछ कहे।

नया लड़का आया

भूरे सूट वाला लड़का जब आया तो माहौल और भी तनावपूर्ण हो गया। लगता है वह किसी बड़ी साजिश का हिस्सा है। प्रतिशोध की डोर में हर किरदार के पीछे एक राज छिपा है और यह लड़का उस राज की चाबी हो सकता है।

फोन का मैसेज

जब फोन पर मैसेज आया 'तुम्हारे घर में खतरा है' तो दिल की धड़कन रुक गई। प्रतिशोध की डोर में यह पल सबसे ज्यादा डरावना है क्योंकि अब पता चल रहा है कि यह सब एक योजना के तहत हो रहा है।

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