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प्रतिशोध की डोरवां54एपिसोड

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प्रतिशोध की डोर

लोहित राजवंश की बेटी आधुनिक युग में सौतेली माँ द्वारा निर्वासित 'मीनाक्षी चतुर्वेदी' के रूप में पुनर्जन्म लेती है। दो वर्ष पश्चात् स्वार्थी चतुर्वेदी परिवार उसे विवाह के लिए बुलाता है। अब JS — विश्व प्रसिद्ध कढ़ाई कलाकार बन चुकी मीनाक्षी 'चतुर्वेदी समूह' पर अधिकार पाने के लिए मायाजाल रचती है। प्रतिशोध के इस समर में 'जितेश बंसल' का निश्छल प्रेम उसके अंतर्मन को जीत लेता है। अंततः मीनाक्षी प्रतिशोध संग अपना सच्चा प्रेम भी पा लेती है।
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इस एपिसोड की समीक्षा

कार में बैठे चेहरे का दर्द

शुरुआत में ही कार के अंदर बैठे नायक के चेहरे पर जो गहरा दर्द और उदासी दिखी, वह दिल को छू गई। लगता है जैसे वह किसी बड़े धोखे की ओर बढ़ रहा हो। प्रतिशोध की डोर की शुरुआत इतनी भावनात्मक हो, यह उम्मीद से परे है। ड्राइवर की चुप्पी और पीछे बैठे शख्स की बेचैनी कहानी के तनाव को बढ़ाती है।

होटल कमरे का हंगामा

जब पत्रकारों का झुंड होटल के कमरे में घुसता है, तो सन्नाटा टूट जाता है। बिस्तर पर बैठे जोड़े की घबराहट साफ दिख रही थी। यह दृश्य इतना तीव्र था कि सांस रुक सी गई। प्रतिशोध की डोर में ऐसे मोड़ आते रहेंगे, यह तो तय है। कैमरे की फ्लैश लाइट्स और चीखें माहौल को और भी डरावना बना देती हैं।

सुनहरी साड़ी वाली महिला का रहस्य

वह महिला जो सुनहरी साड़ी में अकेले बैठी चाय पी रही थी, उसके चेहरे पर एक अजीब सी शांति थी। लगता है वह सब कुछ जानती है। प्रतिशोध की डोर के इस पात्र के पीछे कोई बड़ी साजिश छिपी हो सकती है। उसकी आंखों में छिपा दर्द और मुस्कान के पीछे का मतलब समझना मुश्किल है।

गले लगने वाला पल

जब नायक और वह महिला एक-दूसरे को गले लगाते हैं, तो लगता है जैसे समय थम गया हो। उनकी आंखों में जो भावनाएं थीं, वे शब्दों से परे हैं। प्रतिशोध की डोर के इस दृश्य ने दिल को छू लिया। यह प्यार है या बदले की शुरुआत? कुछ भी हो, यह पल यादगार बन गया।

काले कोट वाला शख्स

काले कोट में चमकदार कंधे वाला नायक जब कमरे में घुसता है, तो उसकी आंखों में गुस्सा और दर्द दोनों दिखते हैं। वह सब कुछ देख रहा है, लेकिन चुप है। प्रतिशोध की डोर का यह किरदार इतना जटिल क्यों है? उसकी चुप्पी शोर मचा रही है। लगता है वह किसी बड़े फैसले के कगार पर है।

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