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प्रतिशोध की डोरवां36एपिसोड

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प्रतिशोध की डोर

लोहित राजवंश की बेटी आधुनिक युग में सौतेली माँ द्वारा निर्वासित 'मीनाक्षी चतुर्वेदी' के रूप में पुनर्जन्म लेती है। दो वर्ष पश्चात् स्वार्थी चतुर्वेदी परिवार उसे विवाह के लिए बुलाता है। अब JS — विश्व प्रसिद्ध कढ़ाई कलाकार बन चुकी मीनाक्षी 'चतुर्वेदी समूह' पर अधिकार पाने के लिए मायाजाल रचती है। प्रतिशोध के इस समर में 'जितेश बंसल' का निश्छल प्रेम उसके अंतर्मन को जीत लेता है। अंततः मीनाक्षी प्रतिशोध संग अपना सच्चा प्रेम भी पा लेती है।
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इस एपिसोड की समीक्षा

बिस्तर पर तनावपूर्ण सुबह

शुरुआत में ही बिस्तर पर दोनों के बीच जो तनाव दिखता है, वह दिलचस्प है। लड़की का डर और लड़के का गुस्सा साफ झलकता है। प्रतिशोध की डोर में ऐसे दृश्य दर्शकों को बांधे रखते हैं। कमरे का माहौल और संवादों की कमी भी कहानी को आगे बढ़ाती है।

कपड़ों की जंग और रिश्तों की कशमकश

जब लड़की गुलाबी रोब में कपड़े चुनती है और लड़का सफेद रोब में खड़ा होकर गुस्सा दिखाता है, तो लगता है कि उनके बीच कुछ गहरा चल रहा है। प्रतिशोध की डोर में ऐसे छोटे-छोटे संकेत बड़े रहस्यों को खोलते हैं। नेटशॉर्ट ऐप पर ऐसे दृश्य देखना मजेदार लगता है।

रात का खतरनाक मोड़

रात के दृश्य में जब दोनों बाहर निकलते हैं, तो माहौल बदल जाता है। लड़की की सफेद पोशाक और लड़के का काला सूट एक विरोधाभास बनाते हैं। प्रतिशोध की डोर में ऐसे दृश्य दर्शकों को चौंका देते हैं। कार का आना और लड़की का डरना कहानी को नया मोड़ देता है।

आंखों में छिपा दर्द

लड़की की आंखों में जो डर और उदासी दिखती है, वह बिना किसी संवाद के भी कहानी कह देती है। प्रतिशोध की डोर में ऐसे अभिनय दर्शकों को भावनात्मक रूप से जोड़ते हैं। नेटशॉर्ट ऐप पर ऐसे दृश्य देखकर लगता है कि कहानी में कुछ गहरा है।

रोब में छिपी कहानी

सफेद और गुलाबी रोब सिर्फ कपड़े नहीं, बल्कि उनके रिश्तों का प्रतीक लगते हैं। लड़के का गुस्सा और लड़की की चुप्पी सब कुछ कह जाती है। प्रतिशोध की डोर में ऐसे विवरण कहानी को समृद्ध बनाते हैं। नेटशॉर्ट ऐप पर ऐसे दृश्य देखना एक अलग अनुभव है।

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