गुलाबी पोशाक वाली लड़की की कढ़ाई देखकर सब हैरान रह गए। उसने इतनी जल्दी इतना सुंदर फूल बना दिया, जैसे उसकी उंगलियों में जादू हो। बूढ़ी दादी का चेहरा देखकर लग रहा था कि वे भी प्रभावित हुई हैं। यह दृश्य प्रतिशोध की डोर की सबसे खूबसूरत झलक थी, जहां कला ने सबकी जुबान बंद कर दी।
जब वह कढ़ाई लेकर खड़ी हुई, तो कमरे में सन्नाटा छा गया। दूसरी लड़कियों के चेहरे पर जलन साफ दिख रही थी। काली पोशाक वाली महिला की नजरें तो जैसे उसे खा ही जाएंगी। प्रतिशोध की डोर में यह टकराव बहुत दिलचस्प था, जहां खामोशी शोर से ज्यादा बोल रही थी।
जैसे ही उसने कढ़ाई दिखाई, रंग-बिरंगी तितलियां उड़ने लगीं। यह दृश्य बिल्कुल सपनों जैसा लग रहा था। सबकी आंखें फटी की फटी रह गईं। प्रतिशोध की डोर में ऐसे जादुई पल देखकर मन खुश हो जाता है। यह सिर्फ कढ़ाई नहीं, एक जादू था जो सबने देखा।
बूढ़ी दादी का रवैया देखकर लग रहा था कि वे सब कुछ समझ रही हैं। उनकी आंखों में एक चमक थी, जैसे वे इस लड़की की काबिलियत को पहचान गई हों। प्रतिशोध की डोर में यह पात्र बहुत अहम लग रहा है, जो सबके बीच न्याय कर सकती हैं।
सफेद और काली पोशाक वाली लड़कियों के चेहरे पर गुस्सा और हैरानी साफ दिख रही थी। उन्हें यकीन नहीं हो रहा था कि यह लड़की इतनी होशियार निकली। प्रतिशोध की डोर में यह ईर्ष्या आगे की कहानी को और भी रोचक बना देगी।