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प्रतिशोध की डोरवां15एपिसोड

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प्रतिशोध की डोर

लोहित राजवंश की बेटी आधुनिक युग में सौतेली माँ द्वारा निर्वासित 'मीनाक्षी चतुर्वेदी' के रूप में पुनर्जन्म लेती है। दो वर्ष पश्चात् स्वार्थी चतुर्वेदी परिवार उसे विवाह के लिए बुलाता है। अब JS — विश्व प्रसिद्ध कढ़ाई कलाकार बन चुकी मीनाक्षी 'चतुर्वेदी समूह' पर अधिकार पाने के लिए मायाजाल रचती है। प्रतिशोध के इस समर में 'जितेश बंसल' का निश्छल प्रेम उसके अंतर्मन को जीत लेता है। अंततः मीनाक्षी प्रतिशोध संग अपना सच्चा प्रेम भी पा लेती है।
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इस एपिसोड की समीक्षा

सूई और धागे का जादू

गुलाबी पोशाक वाली लड़की की कढ़ाई देखकर सब हैरान रह गए। उसने इतनी जल्दी इतना सुंदर फूल बना दिया, जैसे उसकी उंगलियों में जादू हो। बूढ़ी दादी का चेहरा देखकर लग रहा था कि वे भी प्रभावित हुई हैं। यह दृश्य प्रतिशोध की डोर की सबसे खूबसूरत झलक थी, जहां कला ने सबकी जुबान बंद कर दी।

तनावपूर्ण माहौल

जब वह कढ़ाई लेकर खड़ी हुई, तो कमरे में सन्नाटा छा गया। दूसरी लड़कियों के चेहरे पर जलन साफ दिख रही थी। काली पोशाक वाली महिला की नजरें तो जैसे उसे खा ही जाएंगी। प्रतिशोध की डोर में यह टकराव बहुत दिलचस्प था, जहां खामोशी शोर से ज्यादा बोल रही थी।

तितलियों का करिश्मा

जैसे ही उसने कढ़ाई दिखाई, रंग-बिरंगी तितलियां उड़ने लगीं। यह दृश्य बिल्कुल सपनों जैसा लग रहा था। सबकी आंखें फटी की फटी रह गईं। प्रतिशोध की डोर में ऐसे जादुई पल देखकर मन खुश हो जाता है। यह सिर्फ कढ़ाई नहीं, एक जादू था जो सबने देखा।

दादी का फैसला

बूढ़ी दादी का रवैया देखकर लग रहा था कि वे सब कुछ समझ रही हैं। उनकी आंखों में एक चमक थी, जैसे वे इस लड़की की काबिलियत को पहचान गई हों। प्रतिशोध की डोर में यह पात्र बहुत अहम लग रहा है, जो सबके बीच न्याय कर सकती हैं।

ईर्ष्या की आग

सफेद और काली पोशाक वाली लड़कियों के चेहरे पर गुस्सा और हैरानी साफ दिख रही थी। उन्हें यकीन नहीं हो रहा था कि यह लड़की इतनी होशियार निकली। प्रतिशोध की डोर में यह ईर्ष्या आगे की कहानी को और भी रोचक बना देगी।

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