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प्रतिशोध की डोरवां58एपिसोड

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प्रतिशोध की डोर

लोहित राजवंश की बेटी आधुनिक युग में सौतेली माँ द्वारा निर्वासित 'मीनाक्षी चतुर्वेदी' के रूप में पुनर्जन्म लेती है। दो वर्ष पश्चात् स्वार्थी चतुर्वेदी परिवार उसे विवाह के लिए बुलाता है। अब JS — विश्व प्रसिद्ध कढ़ाई कलाकार बन चुकी मीनाक्षी 'चतुर्वेदी समूह' पर अधिकार पाने के लिए मायाजाल रचती है। प्रतिशोध के इस समर में 'जितेश बंसल' का निश्छल प्रेम उसके अंतर्मन को जीत लेता है। अंततः मीनाक्षी प्रतिशोध संग अपना सच्चा प्रेम भी पा लेती है।
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इस एपिसोड की समीक्षा

काली पोशाक वाली महिला का खतरनाक अंदाज

इस दृश्य में काली पोशाक वाली महिला का रवैया बेहद डरावना है। वह अपने हाथों में चाकू लेकर खड़ी है और उसकी आँखों में गुस्सा साफ दिख रहा है। प्रतिशोध की डोर कहानी में तनाव बढ़ाता है। गद्दी पर बैठी लड़की की हालत देखकर दिल दहल जाता है। यह दृश्य दर्शकों को झकझोर देता है।

बांधी हुई लड़की की मासूमियत

सफेद पोशाक वाली लड़की की आँखों में डर और बेबसी साफ झलक रही है। उसके मुंह पर पट्टी लगी है और वह कुछ बोल नहीं सकती। प्रतिशोध की डोर के इस हिस्से में भावनात्मक पहलू बहुत मजबूत है। दर्शक उसकी मदद करना चाहते हैं लेकिन बेबस हैं। अभिनय बहुत स्वाभाविक लगा।

चाकू वाला दृश्य और तनाव

जब वह आदमी चाकू लेकर लड़की के पास जाता है तो पूरा माहौल तनावपूर्ण हो जाता है। प्रतिशोध की डोर में ऐसे दृश्य दर्शकों की सांसें रोक देते हैं। काली पोशाक वाले व्यक्ति का प्रवेश भी बहुत नाटकीय है। हर किरदार का अपना रोल है जो कहानी को आगे बढ़ाता है।

परिवार के रिश्तों में दरार

इस वीडियो में परिवार के रिश्तों की जटिलता दिखाई गई है। काली पोशाक वाली महिला शायद माँ है और उसका गुस्सा किसी गहरे दर्द से जुड़ा है। प्रतिशोध की डोर कहानी में परिवार के टूटे रिश्तों को दिखाता है। गद्दी पर बैठा आदमी भी बेबस लग रहा है।

सफेद पर्दों वाला कमरा और माहौल

पूरा दृश्य एक आधुनिक बैठक कक्ष में सेट है। सफेद पर्दे और काले सोफे का विरोधाभास बहुत अच्छा लगता है। प्रतिशोध की डोर के इस कड़ी में मंच सज्जा भी कहानी का हिस्सा बन गया है। प्रकाश और परछाई का इस्तेमाल डर का माहौल बनाता है।

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