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प्रतिशोध की डोरवां12एपिसोड

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प्रतिशोध की डोर

लोहित राजवंश की बेटी आधुनिक युग में सौतेली माँ द्वारा निर्वासित 'मीनाक्षी चतुर्वेदी' के रूप में पुनर्जन्म लेती है। दो वर्ष पश्चात् स्वार्थी चतुर्वेदी परिवार उसे विवाह के लिए बुलाता है। अब JS — विश्व प्रसिद्ध कढ़ाई कलाकार बन चुकी मीनाक्षी 'चतुर्वेदी समूह' पर अधिकार पाने के लिए मायाजाल रचती है। प्रतिशोध के इस समर में 'जितेश बंसल' का निश्छल प्रेम उसके अंतर्मन को जीत लेता है। अंततः मीनाक्षी प्रतिशोध संग अपना सच्चा प्रेम भी पा लेती है।
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इस एपिसोड की समीक्षा

सूई की नोक पर छिपा खतरा

शुरुआत में ही उस कढ़ाई वाले पंखे में छिपी सूई ने सबकी सांसें रोक दीं। जब नीले पोशाक वाली लड़की ने उसे तोड़ा, तो उसकी आंखों में डर और गुस्सा साफ दिख रहा था। यह दृश्य बताता है कि प्रतिशोध की डोर कितनी बारीक हो सकती है। गुलाबी पोशाक वाली लड़की की मुस्कान में एक अजीब सी चालाकी है, जो आने वाले तूफान का संकेत देती है।

दादी मां का फैसला

लिविंग रूम का वह दृश्य जहां दादी मां अपनी गंभीरता से सबको चुप करा देती हैं, बहुत प्रभावशाली है। युवक की बेचैनी और खड़े आदमी का सम्मान दिखाता है कि इस घर में सत्ता किसके हाथ में है। जब दादी मां उठती हैं, तो लगता है कि अब असली खेल शुरू होगा। प्रतिशोध की डोर में परिवार के रिश्तों की यह जटिलता देखने लायक है।

सीढ़ियों पर मुलाकात

जब युवक सीढ़ियों से उतरता है और नीचे खड़ी लड़कियों की भीड़ उसे देखती है, तो माहौल में एक अलग ही बिजली दौड़ जाती है। गुलाबी पोशाक वाली लड़की की नजरें उससे मिलती हैं और एक अनकही कहानी शुरू होती है। यह दृश्य रोमांस और तनाव का बेहतरीन मिश्रण है। प्रतिशोध की डोर की कहानी अब एक नया मोड़ लेगी।

दो लड़कियों की जंग

नीली और गुलाबी पोशाक वाली लड़कियों के बीच की तनातनी देखकर रोमांच हो जाता है। एक की आंखों में आंसू और दूसरी की मुस्कान में जहर। जब नीली पोशाक वाली लड़की पंखा तोड़ती है, तो लगता है कि उसने अपने आप को एक जाल में फंसा लिया है। प्रतिशोध की डोर में इन दोनों के बीच की दुश्मनी आगे की कहानी का मुख्य बिंदु बनने वाली है।

खामोश गवाह

पार्टी के उस दृश्य में जहां सब नाच रहे हैं, वहां खड़ी दो लड़कियों की चिंतित नजरें सब कुछ बता रही हैं। वे जानती हैं कि कुछ गड़बड़ होने वाली है। जब पंखा टूटता है, तो उनकी प्रतिक्रिया से लगता है कि वे इस साजिश का हिस्सा हैं या फिर बस मजबूर गवाह। प्रतिशोध की डोर में ऐसे छोटे-छोटे संकेत कहानी को और भी रोचक बनाते हैं।

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