पार्किंग गैरेज में वह दृश्य देखकर दिल धड़क गया। उसने उसे सहारा दिया और फिर वह पल आया जब दोनों करीब आए। आंखों में छिपा दर्द और मोहब्बत साफ झलक रही थी। प्रतिशोध की डोर की कहानी में यह पल सबसे खूबसूरत है। एक्टिंग इतनी नेचुरल है कि लगता है सच में प्यार हो रहा है। बैकग्राउंड म्यूजिक और लाइटिंग ने माहौल को और भी इमोशनल बना दिया।
जब वह कार में बैठी और ड्राइवर से बात करने लगी, तो लगा कुछ बड़ा होने वाला है। उसकी आंखों में एक अलग ही चमक थी। फिर अचानक सीन बदला और वह आदमी फोन देखकर चौंक गया। प्रतिशोध की डोर में हर सीन के साथ सस्पेंस बढ़ता जा रहा है। यूजर इंटरफेस पर नेटशॉर्ट ऐप का अनुभव बहुत स्मूथ है, बिना किसी रुकावट के कहानी आगे बढ़ती है।
उसने फोन पर जो न्यूज देखी, उसने सब कुछ बदल दिया। स्क्रीन पर लिखा था कि एक मशहूर डिजाइनर नया ब्रांड लॉन्च कर रहा है। उसका चेहरा देखकर लगा कि उसे झटका लगा है। प्रतिशोध की डोर में ऐसे ट्विस्ट्स कहानी को और भी दिलचस्प बनाते हैं। हर एक्टर ने अपने किरदार को बहुत अच्छे से निभाया है, खासकर वह आदमी जिसकी आंखों में हैरानी साफ दिख रही थी।
कार में दो दोस्तों के बीच की बातचीत बहुत ही रियल लगी। एक हंस रहा था तो दूसरा गंभीर था। यह कॉन्ट्रास्ट बहुत अच्छा लगा। प्रतिशोध की डोर में दोस्ती और दुश्मनी के बीच की लकीर बहुत बारीक दिखाई गई है। डायलॉग डिलीवरी इतनी परफेक्ट है कि लगता है हम भी वहीं बैठे हैं। नेटशॉर्ट ऐप पर ऐसे सीन देखना एक अलग ही अनुभव है।
बीच में सिंगापुर का ड्रोन शॉट दिखाया गया, जो बहुत ही शानदार था। सूरज ढल रहा था और शहर की रोशनी चमक रही थी। प्रतिशोध की डोर में ऐसे विजुअल्स कहानी को एक अलग लेवल पर ले जाते हैं। यह शॉट शायद यह बताने के लिए था कि कहानी अब एक नई जगह पर जा रही है। सिनेमेटोग्राफी बहुत ही लेवल की है।