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कमरे के अंदर का तनाव और बाहर की शांति, दोनों के बीच का अंतर बहुत ही स्पष्ट है। जब लड़का बिस्तर पर बैठता है और बूढ़ी औरत खड़ी होती है, तो लगता है जैसे कोई बड़ा फैसला होने वाला हो। प्रतिशोध की डोर में ऐसे सीन देखकर लगता है कि हर कमरे की अपनी एक कहानी होती है। नेटशॉर्ट पर यह ड्रामा देखना सच में अलग अनुभव है।