PreviousLater
Close

प्रतिशोध की डोरवां44एपिसोड

like2.0Kchase2.0K

प्रतिशोध की डोर

लोहित राजवंश की बेटी आधुनिक युग में सौतेली माँ द्वारा निर्वासित 'मीनाक्षी चतुर्वेदी' के रूप में पुनर्जन्म लेती है। दो वर्ष पश्चात् स्वार्थी चतुर्वेदी परिवार उसे विवाह के लिए बुलाता है। अब JS — विश्व प्रसिद्ध कढ़ाई कलाकार बन चुकी मीनाक्षी 'चतुर्वेदी समूह' पर अधिकार पाने के लिए मायाजाल रचती है। प्रतिशोध के इस समर में 'जितेश बंसल' का निश्छल प्रेम उसके अंतर्मन को जीत लेता है। अंततः मीनाक्षी प्रतिशोध संग अपना सच्चा प्रेम भी पा लेती है।
  • Instagram
इस एपिसोड की समीक्षा

बालकनी से शुरू हुआ तूफान

बालकनी पर खड़ी लड़की की उदासी और नीचे बैठे आदमी का गहरा सन्नाटा, दोनों के बीच की दूरी बहुत कुछ कह जाती है। जब वह मैसेज टाइप करती है तो लगता है जैसे दिल का बोझ हल्का करना चाहती हो। प्रतिशोध की डोर में ऐसे सीन देखकर लगता है कि हर खामोशी के पीछे एक कहानी छिपी होती है। नेटशॉर्ट पर यह ड्रामा देखना सच में अलग अनुभव है।

घाव और सच्चाई का खेल

बिस्तर पर लेटा लड़का और उसकी पीठ पर निशान, यह सब देखकर हैरानी होती है। जब बूढ़ी औरत कमरे में आती है तो माहौल तनावपूर्ण हो जाता है। लगता है जैसे कोई बड़ा राज खुलने वाला हो। प्रतिशोध की डोर की कहानी में यह मोड़ बहुत ही दिलचस्प है। नेटशॉर्ट ऐप पर ऐसे सीन देखकर मन में सवाल उठते हैं।

माँ का गुस्सा और बेटे की मजबूरी

बूढ़ी औरत का गुस्सा और लड़के की मजबूरी, दोनों के बीच का संवाद बहुत ही भावनात्मक है। जब वह उसका हाथ पकड़ती है तो लगता है जैसे माँ का प्यार और गुस्सा एक साथ झलक रहा हो। प्रतिशोध की डोर में ऐसे सीन देखकर लगता है कि रिश्तों की डोर कितनी नाजुक होती है। नेटशॉर्ट पर यह ड्रामा देखना सच में अलग अनुभव है।

मैसेज की दुनिया और असली जिंदगी

लड़की का मैसेज टाइप करना और लड़के का फोन चेक करना, दोनों के बीच की कड़ी बहुत ही दिलचस्प है। लगता है जैसे मैसेज की दुनिया और असली जिंदगी के बीच कोई सेतु बन रहा हो। प्रतिशोध की डोर की कहानी में यह मोड़ बहुत ही अनोखा है। नेटशॉर्ट ऐप पर ऐसे सीन देखकर मन में सवाल उठते हैं।

कमरे का तनाव और बाहर की शांति

कमरे के अंदर का तनाव और बाहर की शांति, दोनों के बीच का अंतर बहुत ही स्पष्ट है। जब लड़का बिस्तर पर बैठता है और बूढ़ी औरत खड़ी होती है, तो लगता है जैसे कोई बड़ा फैसला होने वाला हो। प्रतिशोध की डोर में ऐसे सीन देखकर लगता है कि हर कमरे की अपनी एक कहानी होती है। नेटशॉर्ट पर यह ड्रामा देखना सच में अलग अनुभव है।

और भी शानदार समीक्षाएँ (5)
arrow down