इस दृश्य में चाय की पत्तियों को सूंघने का तरीका बहुत ही नाजुक दिखाया गया है। जब वह सुनहरी पोशाक वाली महिला चाय की पत्तियों को देखती है, तो लगता है जैसे वह किसी पुरानी याद को ताजा कर रही हो। प्रतिशोध की डोर की कहानी में यह छोटा सा पल बहुत गहरा असर छोड़ता है। बारिश का मौसम और छत पर खड़े पुरुषों का दृश्य एक अलग ही रहस्य जोड़ता है।
छत पर खड़े दोनों पुरुषों के बीच की चुप्पी बहुत कुछ कह जाती है। एक काले सूट में है तो दूसरा भूरे रंग के कोट में, दोनों की आंखों में एक अजीब सी बेचैनी है। नीचे चाय पी रही महिलाओं को वे देख रहे हैं, शायद किसी बड़े फैसले की उम्मीद में। प्रतिशोध की डोर का यह हिस्सा दर्शकों को बांधे रखता है।
सुनहरी पोशाक पहनी महिला की सुंदरता और उसके गहने किसी पुरानी कहानी को याद दिलाते हैं। उसके बालों में लगा पंखा और लटकन वाले झुमके बहुत ही खूबसूरत हैं। जब वह चाय की पत्तियों को सूंघती है, तो लगता है जैसे वह किसी प्राचीन अनुष्ठान का हिस्सा हो। प्रतिशोध की डोर में ऐसे दृश्य बहुत ही दिलचस्प हैं।
चाय की पत्तियों को एक-एक करके देखना और उनकी खुशबू लेना एक कला की तरह लगता है। महिलाएं बहुत ध्यान से इस काम को कर रही हैं, जैसे हर पत्ती में कोई राज छिपा हो। यह दृश्य बहुत ही शांत और गहरा है। प्रतिशोध की डोर की कहानी में यह चाय समारोह एक महत्वपूर्ण मोड़ ला सकता है।
इस वीडियो में सबसे खास बात है पात्रों की आंखों की भाषा। जब सुनहरी पोशाक वाली महिला चाय की पत्तियों को देखती है, तो उसकी आंखों में एक अजीब सी चमक है। वहीं, छत पर खड़े पुरुषों की आंखों में एक गहरा दर्द है। प्रतिशोध की डोर की कहानी इन आंखों के जरिए बहुत कुछ कहती है।