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प्रतिशोध की डोरवां59एपिसोड

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प्रतिशोध की डोर

लोहित राजवंश की बेटी आधुनिक युग में सौतेली माँ द्वारा निर्वासित 'मीनाक्षी चतुर्वेदी' के रूप में पुनर्जन्म लेती है। दो वर्ष पश्चात् स्वार्थी चतुर्वेदी परिवार उसे विवाह के लिए बुलाता है। अब JS — विश्व प्रसिद्ध कढ़ाई कलाकार बन चुकी मीनाक्षी 'चतुर्वेदी समूह' पर अधिकार पाने के लिए मायाजाल रचती है। प्रतिशोध के इस समर में 'जितेश बंसल' का निश्छल प्रेम उसके अंतर्मन को जीत लेता है। अंततः मीनाक्षी प्रतिशोध संग अपना सच्चा प्रेम भी पा लेती है।
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इस एपिसोड की समीक्षा

काले सूट वाला हीरो आ गया

जब वो काले वेलवेट सूट में एंट्री लेता है, तो लगता है जैसे कोई सुपरहीरो आ गया हो। उसकी आँखों में गुस्सा और चेहरे पर चिंता साफ दिख रही थी। प्रतिशोध की डोर में ऐसे सीन देखकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं। उसने जिस तरह से लड़की को बचाया, वो दिल को छू गया।

बूढ़े दादाजी का गुस्सा

वो बूढ़े आदमी जो छड़ी लेकर आए, उनकी आँखों में इतना गुस्सा था कि सब डर गए। उन्होंने जिस तरह से सबको डांटा, लगता है वो परिवार के मुखिया हैं। प्रतिशोध की डोर में ऐसे किरदार कहानी को नया मोड़ देते हैं। उनका हर डायलॉग वजनदार लग रहा था।

गुलाबी साड़ी वाली लड़की गिर गई

जब वो लड़की गुलाबी साड़ी में गिर गई, तो लगा जैसे कोई बड़ा धोखा हुआ हो। उसकी आँखों में आंसू और चेहरे पर डर साफ दिख रहा था। प्रतिशोध की डोर में ऐसे इमोशनल सीन देखकर दिल दहल जाता है। उसकी हालत देखकर तरस आ रहा था।

सफेद साड़ी वाली हीरोइन

वो लड़की सफेद साड़ी में बंधी हुई थी, लेकिन उसकी आँखों में हिम्मत थी। जब हीरो ने उसे बचाया, तो लगा जैसे कोई परी आ गई हो। प्रतिशोध की डोर में ऐसे रोमांटिक सीन देखकर दिल खुश हो जाता है। उसकी सुंदरता और हिम्मत सबको पसंद आई।

काले चश्मे वाले गुंडे

वो काले चश्मे वाले गुंडे जब एंट्री लेते हैं, तो लगता है जैसे कोई बड़ा खतरा आ गया हो। उनकी हरकतें और चेहरे का एक्सप्रेशन डरावना था। प्रतिशोध की डोर में ऐसे विलेन कहानी को रोचक बनाते हैं। उनसे डर लग रहा था, लेकिन हीरो ने सबको संभाल लिया।

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